अच्युत कल्पथी आविया, सोलम तीर्थंकर देव;शांति सुधा रस पीववा, सुरनर साधे सेव।भावे जे नर पूजशे, धरी मनमां सद्भाव;तेहने सुख संपत्ति मिले, कटे सकल भव भाव।
भारत के गुजरात राज्य में स्थित पालिताना (शत्रुंजय तीर्थ) जैन धर्म का सबसे पवित्र तीर्थ स्थल है। मान्यता है कि यहाँ 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ और प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) सहित अनेक तीर्थंकरों ने दीक्षा, क्षमा और मोक्ष प्राप्त किया। पालिताना की यात्रा तब सार्थक होती है, जब यात्री (श्रावक) प्रतिदिन (5 Chaityavandan) का पाठ करते हुए मंदिरों में वंदना करें। यह लेख संपूर्ण हिंदी भाषा में, शुद्ध मंत्रों एवं भावार्थ सहित प्रस्तुत है।
विश्वसेन कुल नभामणि, भविजन सुख कंदो। palitana 5 chaityavandan in hindi full
इस प्रकार, एक पूरी आध्यात्मिक कहानी है- जिसका हर अध्याय (हर वंदना) हमें कुछ न कुछ सिखाता है। जो इसे समझकर, भावपूर्वक करता है, उसका जीवन बदल जाता है।
पूर्व नवनु ऋषभदेव, जहाँ स्थापिया प्रभु पाय।" अच्युत कल्पथी आविया
श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे;भाव धरी ने जे चढे, तेने भव पार उतारे।अनंत सिद्धनो आहे ठाम, सकल तीर्थनो राय;पूर्व नवाणु ऋषभदेव, ज्यां ठाविया प्रभु पाय।
Shree Shantrunjay giriraj Yatra Five Chaityavandans - jainsite सोलम तीर्थंकर देव
1. प्रथम चैत्यवंदन: श्री शत्रुंजय महातीर्थ स्तुति