कुछ अंतरराष्ट्रीय स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म या अनौपचारिक वेबसाइटों पर इस फिल्म को अंग्रेजी सबटाइटल्स के साथ देखा जा सकता है। भारतीय दर्शकों के लिए इसे समझने का सबसे बेहतर तरीका अंग्रेजी सबटाइटल्स के साथ मूल इतालवी भाषा में देखना ही है।
पासोलिनी का गहरा राजनीतिक संदेश (The Metaphor Behind the Violence)
Salò, or the 120 Days of Sodom सिनेमाई इतिहास की सबसे कठिन फिल्मों में से एक है। यह हमें यह याद दिलाने के लिए बनाई गई थी कि सत्ता और फासीवाद इंसानी गरिमा को कितनी आसानी से नष्ट कर सकते हैं। salo or the 120 days of sodom movie in hindi
पासोलिनी का मानना था कि आधुनिक पूंजीवाद और उपभोक्तावाद इंसानी शरीर और आत्मा को एक वस्तु (Commodity) की तरह इस्तेमाल करते हैं। फिल्म के घिनौने दृश्य इसी व्यवस्था पर एक कड़ा कटाक्ष हैं।
The reactions to Salò mirror the debates we see in India regarding films like Kantara , Animal , or Padmaavat —albeit on a much more severe scale. The question remains: Where should society draw the line between artistic expression (anti-fascist commentary) and obscenity? The film is designed to be repulsive, and
If you are searching for this movie in Hindi because you are a film student, a political science enthusiast, or a critic, proceed with caution. The film is designed to be repulsive, and Pasolini succeeded masterfully.
रिलीज के बाद से ही इस फिल्म को लेकर वैश्विक स्तर पर भारी विरोध हुआ: a political science enthusiast
यह फिल्म मार्क्विस डी साडे (Marquis de Sade) के 18वीं सदी के इसी नाम के बदनाम उपन्यास पर आधारित है। पासोलिनी ने इस कहानी को मूल कालखंड से हटाकर के दौर में स्थापित किया। यह फिल्म पासोलिनी की आखिरी फिल्म थी, क्योंकि इसकी रिलीज के कुछ ही समय बाद उनकी रहस्यमय परिस्थितियों में हत्या कर दी गई थी। मुख्य कथानक (The Plot Summary)
यह फिल्म । यह सिनेमाई इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसे देखना एक बेहद परेशान करने वाला अनुभव हो सकता है। यह फिल्म "Extreme Cinema" के अंतर्गत आती है। यदि आप सिनेमा में गंभीर राजनीतिक कमेंट्री को पचा सकते हैं और मानसिक रूप से तैयार हैं, तभी इसे देखें। निष्कर्ष
जुनून का चक्र (Circle of Manias) मल का चक्र (Circle of Shit) रक्त का चक्र (Circle of Blood)
Salò, or the 120 Days of Sodom कोई ऐसी फिल्म नहीं है जिसे मनोरंजन के लिए देखा जाए। यह कला और सिनेमा के माध्यम से सत्ता के सबसे क्रूर और काले चेहरे को बेनकाब करने का एक क्रूर प्रयास है। पासोलिनी ने इस फिल्म के जरिए दुनिया को चेतावनी दी थी कि अगर समाज ने फासीवाद और असीमित सत्ता पर अंकुश नहीं लगाया, तो मानवता का हश्र क्या हो सकता है। हिंदी सिनेमा के वे छात्र जो विश्व सिनेमा (World Cinema) को गहराई से समझना चाहते हैं, उनके लिए यह फिल्म इतिहास का एक बेहद कड़वा लेकिन महत्वपूर्ण अध्याय है।